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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 64, Verse 36

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 64, verse 36 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 64 · श्लोक 36

संस्कृत श्लोक

किमिदं कथमायातं किंमूलमिति किंक्षयम् । देहदुःखमिति प्राज्ञैः प्रेक्षणीयं प्रयत्नतः ॥ ३६ ॥

हिन्दी अर्थ

बुद्धिमान्‌ व्यक्तियों को अपनी बुद्धि, शास्त्र और सज्जनों की सहायता लेकर प्रबल प्रयत्न से इस देहाधीन दुःख के विषय में विचार करना चाहिए कि यह क्या है ? कैसे आया ? इसका मूल क्या है ? और इसका विनाश किससे हो सकता है ?