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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 62, Verse 19

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 62, verse 19 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 62 · श्लोक 19

संस्कृत श्लोक

यथा सत्ताविहीनात्मा पदार्थो नोपलभ्यते । तथात्मज्ञानहीनात्मा कालो ज्ञस्य न लभ्यते ॥ १९ ॥

हिन्दी अर्थ

अथवा तत्त्वज्ञ के जीवनकाल का आत्मावबोध असाधारण धर्म है, अत: उससे तत्त्वज्ञ का कमी भी वियोग नहीं होता, इस आशय से कहते है। जैसे घट आदि पदार्थ सत्ता से (अस्तित्व से) विहीन होकर कभी भी उपलब्ध नहीं होते, ऐसे ही तत्त्वज्ञानी का समय आत्मज्ञान से विहीन होकर कभी भी उपलब्ध नहीं होता