Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 61, Verse 25
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 61, verse 25 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 61 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
परिघ उवाच ।
परमानन्दमायातं चेतस्त्वद्दर्शनेन मे ।
इन्दुबिम्ब इवोन्मग्नं मनः शीतलतां गतम् ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
परिघ ने कहा : हे सुरघो, आपके दर्शन से मेरा चित्त अत्यन्त आनन्द को प्राप्त हुआ और चन्द्रबिम्ब
मेँ गोता लगानेवाले मन की नाई मेरा मन अत्यन्त शीतलता को प्राप्त हुआ । चितिशक्ति की प्रधानता
होने पर आनन्द का आविर्भाव होता है मनन शक्ति की प्रधानता होने पर सन्ताप शान्त हो जाता
है