Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 59, Verse 22
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 59, verse 22 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 59 · श्लोक 22
संस्कृत श्लोक
सर्वसौन्दर्यसुभगा सर्वप्राकाश्यदीपिका ।
सर्वसंसारमुक्तानां तन्तुराततरूपिणी ॥ २२ ॥
हिन्दी अर्थ
यह चिति निरतिशयानन्दरूप सर्व सौन्दर्य से परिपूर्ण है , समस्त प्रकाश-
योग्य पदार्थों को प्रकाशित करनेवाली दीपिका है और सम्पूर्ण संसाररूपी मोतियों की मालाको गुहने के
लिए विशाल सूत्र हे