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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 59, Verse 21

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 59, verse 21 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 59 · श्लोक 21

संस्कृत श्लोक

सर्वभावगता सूक्ष्मा भावाभावविवर्जिता । आब्रह्मभुवनान्तःस्था सर्वशक्तिसमुद्गिका ॥ २१ ॥

हिन्दी अर्थ

यह चितिशक्ति समस्त मानसिक वृत्तियों में निवास करती है, (क्योंकि “प्रतिबोधविदितं मतम्‌” यानी जब समस्त वृत्त्यात्मक बोधोंमें पड़े हुए चित्प्रतिबिम्बों के स्वरूप से ब्रह्म विदित होता है, तभी ब्रह्म ज्ञात होता है, यह श्रुति है) सूक्ष्म यानी इसका परिज्ञान करना साधारण खेल नहीं है, अत्यन्त कठिन है, उत्पत्ति और विनाश दोनों से रहित है, पाताल से लेकर ब्रह्मलोक पर्यन्त समस्त भुवनों के भीतर निवास करती है एवं समस्त शक्तियों की मंजुषा (पिटारी) है