Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 59, Verse 2
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 59, verse 2 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 59 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
गते वरमुनौ राजा गत्वैकान्तमनिन्दितम् ।
धिया संचिन्तयामास को नामाहमिति स्वयम् ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
तत्त्वद्रष्टा उक्त मुनि के चले
जाने पर उस राजा ने एकान्त ओर अनिन्दित स्थान में जाकर बुद्धि से विचार किया कि स्वयं मैं
कोन हूँ ?