Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 59, Verse 19
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 59, verse 19 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 59 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
ब्रह्मणीन्द्रे यमे वायौ सर्वभूतगणे तथा ।
स एष भगवानात्मा तन्तुर्मुक्तास्विव स्थितः ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
अपने अनुभव के साथ (एप ब्रह्मैष इन्द्रः“ (यह ब्रह्मा है, यह इन्द्र है) इत्यादि श्रुतियों का संवाद
देते हैं ।
जैसे मोतियों में अनुस्यूत रूप से सूत अवस्थित रहता है, वैसे ही ब्रह्मा, इन्द्र यम, वायु और
समस्त प्राणियों के समूह में यह निखिल ऐश्वर्यों से परिपूर्ण तत्पदबोध से आत्मा अनुस्यूतरूप से अवस्थित
है