Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 58, Verse 47
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 58, verse 47 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 58 · श्लोक 47
संस्कृत श्लोक
स्वात्मावलोकनार्थं तु तस्मात्सर्वं परित्यजेत् ।
सर्वं किंचित्परित्यज्य यद्दृष्टं तत्परं पदम् ॥ ४७ ॥
हिन्दी अर्थ
इससे आत्मा का साक्षात्कार
करने के लिए सभी विषयों का परित्याग करना चाहिए सबका परित्याग करने पर जो कुछ (जिसे छोड
नहीं सकते, ऐसा तत्त्व) दिखाई देगा, वही परम पद है