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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 58, Verse 43

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 58, verse 43 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 58 · श्लोक 43

संस्कृत श्लोक

सर्वः सार्विकया बुद्ध्या सर्वं सर्वत्र सर्वदा । सर्वथा संपरित्यज्य स्वात्मनात्मोपलभ्यते ॥ ४३ ॥

हिन्दी अर्थ

सर्वात्मक बुद्धि से सर्वदा सभी प्रकारो से सब देशों मे सभी दृश्यों का परित्याग कर पूर्णात्मा अपने आप से ही प्राप्त होता है । एकाध बार, किसी एक जगह, किसी प्रकार कुछ विषयों का परित्याग करनेमात्र से वह प्राप्त नहीं होता, यह तात्पर्य हे