Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 57, Verse 9
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 57, verse 9 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 57 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
यदात्मगगनस्यान्तश्चित्त्वात्सौषिर्यवेदनम् ।
तदहंतादि भेदादि शरीरादि च दीपितम् ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
आत्मरूपी आकाश
काचित् होने से जो मूर्त पदार्थो के अन्दर छिद्रता प्रथितरूप वेदन है वह अहन्ता, त्वन्ता भेद ओर शरीर
आदि रूपसे प्रदीप्त हैँ