Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 57, Verse 20
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 57, verse 20 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 57 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
न चित्तमस्ति नो चेता न जगत्तादिविभ्रमः ।
वृष्टमूकाम्बुदसितं शान्तं शाम्यति केवलम् ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
न चित्त है, न प्रमाता है ओर न जगदाकार आदि विभ्रम है, पहले वर्षाकाल में बरस चुकने
के कारण बाद में शरत्-काल में शब्दशून्य हुए मेघ के समान शुद्ध अर्थात् अधिष्ठान-सदात्मरूप से
परिशिष्ट बाधित जगत् शान्त हुआ ही शान्ति को प्राप्त होता है