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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 57, Verse 19

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 57, verse 19 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 57 · श्लोक 19

संस्कृत श्लोक

अनया तु वचोभङ्ग्या मया ते रघुनन्दन । नाहंतादिजगत्तादिभेदोस्तीति निदर्शितम् ॥ १९ ॥

हिन्दी अर्थ

तब “यदात्ममरिचस्य“ इत्यादि कथन का क्या अभिप्राय है ? इस प्रश्न पर उसका अभिप्राय कहते हैं । श्रीरामचन्द्रजी, इस वचोभंगी से यानी 'यदात्ममरिचस्य' इत्यादि वाक्यों से मैंने आपको इसका दिग्दर्शन कराया कि अहंतादि (जीवभाव आदि) एवं जगत्तादिका (जगद्‌भाव आदि का) तनिक भी भेद नहीं है