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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 56, Verse 59

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 56, verse 59 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 56 · श्लोक 59

संस्कृत श्लोक

अहंत्ववासनानर्थप्रसूतेः संविदात्मनः । पुरुषस्य विचित्राणि सुखदुःखानि जन्मनि ॥ ५९ ॥

हिन्दी अर्थ

तब संसार दु:ख प्राप्ति का क्या कारण है ? ऐसी शंका होने पर संसार दुःख प्राप्ति का उपाय कहते हैं । अहंकार के अध्यास से वासनारूपी अनर्थो के उद्बुद्ध होने से पुरुष के जन्म में विचित्र सुख-दुःख होते हैं