Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 56, Verse 58
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 56, verse 58 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 56 · श्लोक 58
संस्कृत श्लोक
समस्तवस्तुप्रशमात्सम्यग्ज्ञानाद्यथास्थितेः ।
स्वभावस्योपशान्तोन्तःकलङ्कोऽसत्तया स्वतः ॥ ५८ ॥
हिन्दी अर्थ
किस उपाय से कलंक की शान्ति होती है, ऐसा प्रश्न होने पर उसे कहते हैं।
वस्तु स्थितिका भली-भाँति ज्ञान होने से सब वस्तुओं के प्रशमन होने के कारण चित्त का कलंक
बाधवश असत्ता से स्वतः शान्त हो जाता है