Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 56, Verse 29
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 56, verse 29 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 56 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
सदात्मना सदेवेदं जगत्पश्यति नो मनः ।
यथा स्वप्ने तथैवास्मिञ्जाग्रत्यपि जनेश्वर ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
हे जनेश्वर, उसका मन जैसे स्वप्न में वैसे ही जाग्रत् में भी इस दृश्य को सत्रूप
से सद् ही देखता है । जगत् को (सद् से व्यतिरिक्त रूप को) नहीं देखता है