Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 56, Verse 26
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 56, verse 26 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 56 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
व्युत्थितं चित्तमभ्येति भ्रमस्यान्तः सुषुप्तताम् ।
निर्वाणमेति निर्वाणं यथेच्छसि तथा कुरु ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
यह राग आदि से विक्षिप्त हुआ चित्त विविध विषयभ्रम का अन्दर लय होने से
फिर सैकड़ों व्युत्थानों की बीजभूत सुषुप्ति को प्राप्त होता है । राग आदि की वासनाओं से रहित चित्त
मोक्ष को प्राप्त होता है। आप जैसे चाहे वैसा करें