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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 56, Verse 1

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 56, verse 1 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 56 · श्लोक 1

संस्कृत श्लोक

श्रीवसिष्ठ उवाच । क्रमेणानेन विहरन्विचार्यात्मानमात्मना । विश्रान्तिमेहि वितते पदे पद्मदलेक्षण ॥ १ ॥

हिन्दी अर्थ

श्रीवसिष्ठजी ने कहा : हे श्रीरामचन्द्रजी, पूर्वोक्त विचार, वैराग्य ओर समाधि के अभ्यास के क्रम से विहार कर रहे आप अपने आत्मस्वरूप का विचारकर भूमाख्य परम पद में विश्रान्ति को प्राप्त होइये

सर्ग सन्दर्भ

पवपनर्वोँ सर्ग समाप्त छण्पनवा सर्ग॑ मायारूपी अन्धकार से शून्य वासनारहित प्रबुद्ध पुरुष व्यवहाररत होने पर भी समाधिस्थ है, यह वर्णन |