Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 55, Verse 22
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 55, verse 22 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 55 · श्लोक 22
संस्कृत श्लोक
बभूव स महासत्त्वो लिपिकर्मार्पितोपमः ।
समः कलावपूर्णेन शरदच्छाम्बरेन्दुना ॥ २२ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, वे महात्मा उद्दालक
चित्रलिखित के समान अनन्यचित्त एवं अचल होकर समस्त कलाओं से परिपूर्णं शरद्ऋतु के स्वच्छ
आकाश के चन्द्रमा के समान विशुद्ध हो गये