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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 55, Verse 21

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 55, verse 21 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 55 · श्लोक 21

संस्कृत श्लोक

संशान्तानन्दपुलकः पदं प्राप्यामलं गतः । चिरकालपरिक्षीणमननादिभवभ्रमः ॥ २१ ॥

हिन्दी अर्थ

आनन्द के आविभवि के द्योतक रोमांच चिह्नों की भी क्रम से उपरति दिखलाते हैं। हे श्रीरामचन्द्रजी, शान्त रोमांचोवाले तथा मनन, निदिध्यासन आदि द्वारा चिरकाल में जिनका जगद्विषयक भ्रम क्षीण हो चुका था, ऐसे उद्दालक ऋषि जीते हुए ही निर्वाण पद को प्राप्त करके प्रारब्ध भोग के हेतुभूत शेष दोषों के क्षय के कारण विशुद्ध हो गये