Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 54, Verse 91
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 54, verse 91 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 91
संस्कृत श्लोक
चित्तत्त्वैकघनाभ्यासान्महाचित्त्वमुपेत्य सः ।
बभूव सर्वत्र समस्तेजः सौरमिवावनौ ॥ ९१ ॥
हिन्दी अर्थ
जिस प्रकार पृथिवी पर सूर्य का तेज सर्वत्र सम रहता है उसी प्रकार
अन्तःकरणवृत्ति के अनुगत और उसके साक्षी चिद्मात्र के निरन्तर साक्षात्कारूपी समाधि के अभ्यास
से अपरिच्छिन्न चिद्भाव को प्राप्त करके वह मुनि सर्वत्र राग-द्वेष को छोड़ देने से और करुणा से
अविषम ब्रह्मभाव के दर्शन से सम रहे