Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 54, Verse 90
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 54, verse 90 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 90
संस्कृत श्लोक
उद्दालकस्तदारभ्य व्यवहारपरोऽपि सन् ।
सुसमाहित एवासौ चित्तत्त्वैकत्वमागतः ॥ ९० ॥
हिन्दी अर्थ
उस समय से उद्दालक मुनि व्यवहारकाल में भी चिद्भावरूप एकत्व को प्राप्त हो
समाहित चित्त ही रहते थे। अज्ञ के समान विक्षिप्तचित्त नहीं रहते थे । अर्थात् व्यवहारिक दशा में भी
ध्यानस्थ ही रहते थे