Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 54, Verse 85
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 54, verse 85 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 85
संस्कृत श्लोक
अथ स्वधर्मनिरतं भोगेष्वरतिमागतम् ।
तमुपास्य ययुः सिद्धा दिनैः कतिपयैः स्वयम् ॥ ८५ ॥
हिन्दी अर्थ
इसके अनन्तर अपने धर्म में निरत अतएव भोगों मे प्रेम न करते हुए उद्दालक मुनि की
चिरकाल तक प्रतीक्षा, प्रणाम, प्रशंसा आदि द्वारा उपासना कर सिद्ध लोग कुछ दिनों में स्वयं चले
गये