Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 54, Verse 73
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 54, verse 73 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 73
संस्कृत श्लोक
चेतस्तत्पदविश्रान्तं बुद्धं दृश्यदशां प्रति ।
कदर्थाद्बोधमायाति नायात्येवाथवानघ ॥ ७३ ॥
हिन्दी अर्थ
हे निष्पाप श्रीरामचन्द्रजी, उस पद में विश्रान्ति को प्राप्त हुआ अतएव बोध को
प्राप्त हुआ चित्त षष्ठम भूमिका में दूसरों के महाप्रयत्न से समाधि व्युत्थानदशा के प्रति बोध को प्राप्त
करता है या सप्तम भूमिका में उसको भी प्राप्त नहीं करता है