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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 54, Verse 66

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 54, verse 66 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 66

संस्कृत श्लोक

सिद्धिसार्थमनादृत्य तस्मिन्नानन्दमन्दिरे । अतिष्ठदथ षण्मासान्दिक्तटेऽर्क इवोत्तरे ॥ ६६ ॥

हिन्दी अर्थ

उत्तरायण के आधारभूत दिग्‌भाग में सूर्य जिस प्रकार छःमास तक रहता है उसी प्रकार उद्दालक उस आनन्द-मन्दिररूप समाधि में सिद्धियों के गणो का अनादर करके छः महीने तक स्थित रहे