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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 54, Verse 65

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 54, verse 65 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 65

संस्कृत श्लोक

तानि नादरयांचक्रे सिद्धिवृन्दानि स द्विजः । गम्भीरमतिरक्षुब्धो विलासानिव शैशवान् ॥ ६५ ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे गंभीर बुद्धि उदारपुरुष वच्चो के विलास के साधन खिलौनों का आदर नहीं करता वैसे ही क्षोभरहित गम्भीर बुद्धिवाले उद्दालकने उन सिद्धिगणों का आदर नहीं किया