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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 54, Verse 18

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 54, verse 18 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 18

संस्कृत श्लोक

अस्मिन्नवसरे प्राणाश्चेतनामृतमध्यगाः । व्योम्नि शीतलतामीयुर्हिमसंस्पर्शसुन्दरीम् ॥ १८ ॥

हिन्दी अर्थ

इस तृतीय अवसर में, जीव चैतन्य में (जीवचित्‌ में) अर्थात्‌ जीवात्मा में भावना द्वारा भावित अमृत के (ब्रह्म के) मध्य में गये हुए प्राणों ने हिम के स्पर्श की तरह सुन्दर शीतलता प्राप्त की