Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 54, Verse 13
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 54, verse 13 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
यत्र कर्पूरशय्यायां सुप्तानीव सुखोचितम् ।
शरीरास्थीनि लक्ष्यन्ते निष्पन्दानि सितानि च ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
जिस अवस्था में शरीर की निश्चल एवं श्वेत हड्डियाँ मानों कपूर के चूर्ण से
सुसज्जित शय्या में उचित सुख से सोई हुई-सी भावना से मालूम पड़ी