Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 53, Verse 9
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 53, verse 9 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 53 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
अहंभावो मुधा मोहो मनश्च मृगतृष्णिका ।
जडः पदार्थसंभारः कस्याहंकारभावना ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
देह में अहंभावना क्या अहंकार की है अथवा मन की है या पदार्थ समूह की है ? इनमें से पहले
के दो (अहंकार और मन) प्रमाण वैद्य नहीं हैं, इसलिए असत्स्वरूप है । पदार्थ भी अत्यन्त जड़ हैं,
अतएव वे भी अभिमान योग्य नहीं हैं, इसलिए अहंभावना का न तो कोड विषय है और न आश्रय
है, ऐसा कहते हैं ।
अहंकार व्यर्थ मोहरूप है, मन मृगतृष्णारूप है तथा पदार्थ समूह जड़ है; अत: अहंकार भावना
किसे हो ?