Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 53, Verse 8
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 53, verse 8 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 53 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
यो ह्यहंभावतां प्राप्तो भावाभावैः स गृह्यते ।
आत्मनो नास्त्यहंभावो भावाभावाः कुतोऽस्य ते ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
जो देह में अहंभावता को प्राप्त है, वह देह के भाव और
अभावरूप जन्म मरणों के फन्दे में पड़ता है । आत्मरूप तुममें देहाहंभाव नहीं है; इसलिए तुम्हारे भाव
और अभावरूप जन्म-मरण कहाँ से होंगे ?