Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 53, Verses 78–81
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 53, verses 78–81 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 53 · श्लोक 78-80
संस्कृत श्लोक
स्वच्छतोर्जितता सत्ता हृद्यता सत्यता ज्ञता ।
आनन्दितोपशमिता सदा च मृदुभाषिता ॥ ७८ ॥
पूर्णतोदारता सत्या कान्तिमत्तैकतानता ।
सर्वैकता निर्भयता क्षीणद्वित्वविकल्पता ॥ ७९ ॥
नित्योदिताः समाः स्वस्थाः सुन्दर्यः सुभगोदयाः ।
ममैकात्ममतेर्नित्यं कान्ता हृदयवल्लभाः ॥ ८० ॥
सर्वथा सर्वदा सर्वं सर्वस्मिन्संभवत्यतः ।
सर्वं प्रति मम क्षीणे वाञ्छावाञ्छे सुखासुखे ॥ ८१ ॥
हिन्दी अर्थ
पूर्वोक्त प्रारब्ध शेष भोगलीला में स्वच्छता आदि गुण सम्पत्तियाँ मेरी हृदयंगम कान्तार हैं, यों
उनका निरूपण करते हैं।
स्वच्छता, पूर्णकामता, सत्ता (सद्रूपता), सर्वप्रियता, सत्यता (अबाध्यता), ज्ञानिता,
आनन्दस्वरूपता, निर्विकारता, सदा मृदुभाषिता, पूर्णता, निर्लोभिता, अबाधित स्वभावता, कान्तिमत्ता,
एकतानता, सवत्मिकता, निर्भयता, द्वित्वादिविकल्पअभावना आदि ये मेरी नित्य उदित हुई स्वस्थ,
सम, सुन्दरी तथा सुन्दर उदयवाली कान्तार है, जो एकमात्र आत्मनिष्ठ मुझे सदा प्रिय है