Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 53, Verse 74
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 53, verse 74 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 53 · श्लोक 74
संस्कृत श्लोक
यत्रात्मा तत्र न मनो नेन्द्रियाणि न वासनाः ।
पामरा परितिष्ठन्ति निकटे न महीभृतः ॥ ७४ ॥
हिन्दी अर्थ
न तो मेँ अज्ञानी हूँ, न मुझे दुःख है, न अनर्थ है ओर न मुझमें दुःखिता है। मेरा शरीर रहे चाहे
न रहे मैं सन्ताप शून्य होकर स्थित हूँ ॥७ ३॥
भूमा में (सर्वव्यापक ब्रह्म में) मन आदि की प्राप्ति ही नहीं है, ऐसा कहते हैं।
जैसे राजा के निकट पामर लोग नहीं रह सकते वैसे ही जहाँ पर आत्मा है वहाँ न मन रहता है, न
इन्द्र्यो रहती हे ओर न विविध वासनाएँ ही रहती हैं