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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 53, Verse 62

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 53, verse 62 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 53 · श्लोक 62

संस्कृत श्लोक

नष्टानष्टमनर्थाय शरीरं पदमापदाम् । अलब्धात्मविवेकेन मनसा सुप्रजायते ॥ ६२ ॥

हिन्दी अर्थ

यदि कोई कहे, तब मन भी देह के विनाश के लिए क्यों यत्न नहीं करता है ? तो, इस पर कहते हैं । जिस मन को आत्मविवेक नहीं हुआ उसके द्वारा शरीर चाहे नाश को प्राप्त किया गया हो चाहे न किया गया हो वह आपत्तियों का स्थान बनकर अनर्थो की ही सृष्टि करता है, इसलिए शरीर के नाश में मन की इष्टसिद्धि नहीं होती है, यह अर्थ हे