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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 53, Verse 61

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 53, verse 61 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 53 · श्लोक 61

संस्कृत श्लोक

मनस्येव परिक्षीणे न देहो दुःखभाजनम् । तत्क्षयोत्कतया नित्यं देहोऽपि परिधावति ॥ ६१ ॥

हिन्दी अर्थ

मन का विनाश होने पर तो देह को फिर दुःख प्राप्ति नहीं होती है, ऐसा कहते हैं। मन का ही विनाश होने पर शरीर दुःख का भाजन नहीं होता है, इसलिए शरीर भी मन के विनाश में उत्कण्ठित होने के कारण ज्ञान और उसकी प्राप्ति के उपायों में नित्य यत्न करता है