Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 53, Verse 47
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 53, verse 47 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 53 · श्लोक 47
संस्कृत श्लोक
अवस्त्विदमिति स्फारे रूढे मनसि निश्चये ।
हेमन्त इव मञ्जर्यः क्षीयन्ते भोगवासनाः ॥ ४७ ॥
हिन्दी अर्थ
तुम्हारे कारण हुई भोगवासनाओं का भी उसी से क्षय हो जाता है, ऐसा कहते है ।
यह अवास्तविक है, ऐसा मन में दढ निश्चय होने पर हेमन्तऋतु में वृक्षों की मंजरियों की नाई
भोगवासनाएँ क्षीण हो जाती हैँ