Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 53, Verse 36
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 53, verse 36 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 53 · श्लोक 36
संस्कृत श्लोक
अपर्यन्तपुराकाले मृदि कुम्भ इवाकृतिः ।
देहोऽभवदिदानीं तु तथैवास्ति भविष्यति ॥ ३६ ॥
हिन्दी अर्थ
इस रीति से उत्पत्ति से पहले देह आदि की जैसे स्थिति थी वैसी ही सर्वदा रहती है, यह सिद्ध हुआ,
ऐसा कहते है ।
सृष्टि से पूर्वं अनादि अनन्तकाल में मि मेँ घटरूप आकार के समान ब्रह्म में हीं शरीर था, वैसे ही
इस समय भी है और आगे भी वैसे ही होगा