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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 53, Verse 35

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 53, verse 35 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 53 · श्लोक 35

संस्कृत श्लोक

इदं जगदुदेत्यादावकारणमकारणात् । यदकारणमुद्भूतं तत्सदित्युच्यते कथम् ॥ ३५ ॥

हिन्दी अर्थ

भाव यह कि विश्व के असत्य सिद्ध होने पर उससे होने वाला सारा का सारा भेदव्यवहार भी असत्य है, जब यह भेदव्यवहार असत्य हो गया तब (त्वम्‌* अहम्‌” यह भेद व्यवहार भी कहाँ सत्य रहा ? अतएव सत्य प्रयोजन से सर्वथा रहित ही यह जगत्‌ पहले कारणत्व के अयोग्य अज्ञान से उदित होता है । जो वस्तु बिना कारण के उत्पन्न हुई वह "सत्‌ केसे कही जा सकती है ?