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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 53, Verse 20

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 53, verse 20 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 53 · श्लोक 20

संस्कृत श्लोक

इन्द्रियैरिन्द्रियैरंगैर्मनो मनसि वल्गति । चिदलिप्तवपुः केन संबन्धः कस्य किं कथम् ॥ २० ॥

हिन्दी अर्थ

सम्बन्ध का उपपादन करते हैं। मन अपने अवयवरूप से कल्पित सब इन्द्रियों से मन में ही स्वप्न के समान उल्लास को प्राप्त होता है। बाह्य विषयों का स्पर्श करने के लिए समर्थ नहीं होता; किन्तु चित्‌ तो इन्द्रियों ओर बाह्मविषयों से अलिप्त स्वरूप (असंगस्वभाव) है। ऐसी अवस्था में किसका किसके साथ सम्बन्ध कैसे और किसके द्वारा हो सकता है ?