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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 53, Verses 13–14

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 53, verses 13–14 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 53 · श्लोक 13

संस्कृत श्लोक

सर्वगं सर्वदेहस्थं सर्वकालमयं महत् । केवलं परमात्मानं चिदात्मैवेह संस्थितः ॥ १३ ॥ एवं किमाकृतिः को वा किमादेशश्च किंकृतः । किंरूपः किंमयः कोहं किं गृह्णामि त्यजामि किम् ॥ १४ ॥

हिन्दी अर्थ

इस देह में जो चिदात्मा है, वह भी सर्वगामी (सर्वव्यापक), सब देहों में स्थित, सर्वकालमय महान्‌ अद्वितीय परमात्मा ही मैं हूँ, यों निश्चय कर स्थित है, वह भी अहंकारास्पद नहीं है, यह अर्थ है