Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 52, Verse 8
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 52, verse 8 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 52 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
अयि मूर्ख मनः कोऽर्थस्तव संसारवृत्तिभिः ।
धीमन्तो न निषेवन्ते पर्यन्ते दुःखदां क्रियाम् ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
अरे मूर्ख मन, तुम्हारा संसार वृत्तियों से क्या मतलब
है? बुद्धिमान् लोग अवसान मेँ (अंत में) दुःख देनेवाले कर्म का सेवन (आचरण) नहीं करते हैं