Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 52, Verse 62
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 52, verse 62 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 52 · श्लोक 62
संस्कृत श्लोक
भवद्भिरेव दुःखाय वासनावासिता मुधा ।
बालैः पङ्कक्रीडनकं विनाशेनेव खिन्नता ॥ ६२ ॥
हिन्दी अर्थ
अब इन्द्रियो को सम्बोधित कर इस अर्थ का विचारपूर्वक उन्हें उपदेश देते हैं।
इसलिए हे मूर्ख इन्द्रियाँ, भीतर अपनी वासना का त्यागकर तुम सब कर्म करो, उससे तुम्हें दु:ख
प्राप्त नहीं होगा ॥ ६ १॥ जैसे बालक पहले मिट्टी के खिलौने बनाते हैं फिर उनके विनाश से उन्हें पश्चात्ताप
होता है वैसे ही तुमने (इन्द्रियों ने) भी विषयों के उपार्जन और उनके विनाश में केवल दुःख के लिए ही
अज्ञ आत्मा में भोगवासना की व्यर्थ स्थापना की है