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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 52, Verse 30

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 52, verse 30 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 52 · श्लोक 30

संस्कृत श्लोक

तस्मात्संक्षीयमाणत्वात्त्यजामि त्वामसन्मयम् । मौर्ख्यं परममेवाहुः परित्याज्यानुशासनम् ॥ ३० ॥

हिन्दी अर्थ

उक्त का ही अनुवाद द्वारा उपसंहार करते हैं। चूँकि तुम दिन पर दिन क्षीण हो रहे हो, इसलिए क्षीयमाण होने के कारण असन्मय तुमको मैं त्यागता हूँ। विद्वान्‌ जन परित्याज्य को उपदेश देना भारी मूर्खता ही कहते हैं