Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 52, Verse 29
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 52, verse 29 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 52 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
अनुशासनमेतद्यदसतो नश्यतोऽथ वा ।
क्रियते तन्नभोवारिपवनाहननैः समम् ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
अविवेकी का चित्त उपदेश के अयोग्य ही है, किन्तु विवेकी का चित्त भी चाहे वह नष्ट हो रहा हो
चाहे नष्ट हो चुका हो युतरां उपदेश के अयोग्य है, इस आशय से कहते हैं।
असत् अथवा नाश को प्राप्त हो रहे चित्त का जो यह उपदेश किया जाता है, यह आकाश के, जल
के और वायु के ताडने के समान व्यर्थ है