Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 51, Verse 54
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 51, verse 54 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 51 · श्लोक 54
संस्कृत श्लोक
उपशमपदवीमिवानुरूपां कमलजविश्रमणाय योग्यरूपाम् ।
कुसुमनिकरकोमलाभिरामां सरसिजकोटरकोमलां समन्तात् ॥ ५४ ॥
हिन्दी अर्थ
वह गुफा कमल के मध्यभाग के समान कोमल थी, अतएव ब्रह्मा के विश्राम के योग्य
थी, चारों ओर फूलों की राशियों से कोमल और बडी मनोहर थी तथा उपशम पदवी के समान सदा ही
आश्रय लेने के अनुरूप थी