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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 51, Verse 53

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 51, verse 53 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 51 · श्लोक 53

संस्कृत श्लोक

बालालोकपरिम्लानां कोमलाशब्दमारुताम् । मञ्जरीजटिलोपेतां बालां मालावतीमिव ॥ ५३ ॥

हिन्दी अर्थ

वह गुफा बाल सूर्य से सूखी हुई थी (इससे यह व्यक्त होता है कि उसका मुँह पूर्व की ओर था) उसमें बिना शब्द का मन्द-मन्द पवन बहता था (इससे यह व्यक्त होता है कि पश्चिम की ओर उसमें खिड़कियाँ थी) ओर मंजरियों से लदे हुए वृक्षों से वह युक्त थी (इससे उसमें सुगन्धि व्यक्त होती है) । वह स्वयंवर के लिए तत्पर अतः हाथ में वरमाला ली हुई राजकन्या के समान थी