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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 51, Verse 40

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 51, verse 40 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 51 · श्लोक 40

संस्कृत श्लोक

कदाचिद्बाह्यसंस्पर्शपरित्यागादनन्तरम् । तस्यागच्छच्चित्तकपिः प्रोद्वेगं सत्त्वसंस्थितौ ॥ ४० ॥

हिन्दी अर्थ

किसी एक समय बाह्य विषयों के संबन्ध के त्याग के अनन्तर उनका चित्तरूपी वानर सात्त्विक देवता आदि से भोग्य विषय में या सात्त्विक वृत्ति के सुखास्वाद में मनोरथो द्वारा चंचलता को प्राप्त हुआ