Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 51, Verse 18
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 51, verse 18 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 51 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
कदाहं त्यक्तमनने पदे परमपावने ।
चिरं विश्रान्तिमेष्यामि मेरुश्रृङ्ग इवाम्बुदः ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे मेरु पर्वत
के शिखर पर मेघ चिरकाल तक विश्राम को प्राप्त होता है वैसे ही जिसमें मन के व्यापारं का त्याग हो
चुका हो ऐसे परम पावन पद में मै, चिरकाल तक कब विश्रान्ति को प्राप्त होऊँगा ?