Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 51, Verse 17
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 51, verse 17 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 51 · श्लोक 17
संस्कृत श्लोक
किं तत्प्राप्यं प्रधानं स्याद्यद्विश्रान्तौ न शोच्यते ।
यत्प्राप्य जन्मना भूयः संबन्धो नोपजायते ॥ १७ ॥
हिन्दी अर्थ
प्राप्त करने योग्य पुरुषार्थो में से प्रधान मोक्षरूप पुरुषार्थ क्या है ? इसमें विश्रान्ति होने
पर फिर शोक नहीं होता तथा जिसे प्राप्त करके फिर जन्म से सम्बन्ध नहीं होता