Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 50, Verse 57
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 50, verse 57 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 50 · श्लोक 57
संस्कृत श्लोक
अन्यात्मन्यात्मभावेन देहमात्रास्थयानया ।
पुत्रदारकुटुम्बैश्च चेतो गच्छति पीनताम् ॥ ५७ ॥
हिन्दी अर्थ
मन की स्थूलता के हेतु कौन हैं ? जिनके त्याग से मन में कृशता हो, ऐसी आशंका होने पर मन की
कृशता के हेतुओं को कहते है।
अनात्मा में (देह, इन्द्रिय आदि में ) आत्म भाव से, इस देहमात्र में आस्था से, पुत्र, कलत्र ओर
कुटुम्ब से चित्त स्थूलता को प्राप्त होता हे