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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 50, Verse 56

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 50, verse 56 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 50 · श्लोक 56

संस्कृत श्लोक

भोगाभोगतिरस्कारैः कार्श्यं नेयं शनैर्मनः । रसापहारैस्तज्ज्ञेन कालेनाजीर्णपर्णवत् ॥ ५६ ॥

हिन्दी अर्थ

इसलिए मन को प्राप्त भोगों के (विषयों के) सेवन के तिरस्कार द्वारा ओर अप्राप्त भोगों की अभिलाषा के त्याग द्वारा समय से अजीर्णं पत्र के समान धीरे-धीरे कृश बनाना चाहिये