Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 50, Verse 25
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 50, verse 25 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 50 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
शास्त्रसज्जनसंपर्कसंतताभ्यासयोगतः ।
जागतानामवस्तुत्वं भावानामवगम्यते ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
जो पदार्थ पहले वास्तविक रूप से ज्ञात हों उनका किस उपाय से अवस्तुत्वज्ञान रूप बाघ होता है,
ऐसा प्रश्न होने पर उसे कहते हैं।
शास्त्र और सज्जनसंगति के निरन्तर अभ्यास से जगत् के पदार्थों की अवास्तविकता ज्ञात होती
है